Wednesday, July 29, 2026
Kumbha Fort, Chittorgarh!
कुंभा किला (कुंभलगढ़ नहीं): वह दुर्ग जहाँ इतिहास की कई परतें आज भी छिपी हैं
"एक ऐसा किला..."
"जिसकी दीवारें सदियों के संघर्ष और राजपूती शौर्य की गवाह हैं।"
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले में स्थित कुंभा किला (जिसे राणा कुंभा महल परिसर के नाम से भी जाना जाता है) मेवाड़ के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में से एक है।
इसका विस्तार और पुनर्निर्माण 15वीं शताब्दी में महाराणा कुंभा ने कराया था, जिन्हें मेवाड़ के महानतम शासकों में गिना जाता है।
यही वह स्थान माना जाता है जहाँ महाराणा उदयसिंह द्वितीय का बचपन बीता और जहाँ पन्ना धाय ने अपने पुत्र का बलिदान देकर उदयसिंह की जान बचाई—जो मेवाड़ के इतिहास की सबसे मार्मिक घटनाओं में से एक है।
महल में विशाल आँगन, राजसी कक्ष, भूमिगत हिस्से और प्राचीन स्थापत्य कला आज भी उस गौरवशाली युग की याद दिलाते हैं।
यह परिसर केवल एक महल नहीं, बल्कि मेवाड़ के साहस, त्याग और दूरदर्शिता का जीवंत प्रतीक माना जाता है।
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