Sunday, October 11, 2026
Gurudwara 'Langar'!
एक होटल में एक आदमी दाल रोटी खा रहा था, अच्छे परिवार का बुज़ुर्ग था, खाने के बाद जब बिल देने की बारी आई तो वो बोला की उसका बटुआ घर रह गया है, और वो थोड़ी देर में आकर बिल चूका जाएगा,
काउंटर पर बैठे होटल के मालिक जो सरदार जी थे ने कहा "कोई बात नहीं, जब पैसे आ जाएं तो दे जाना" और वो वहां से चला गया,बेयरा ने जब ये देखा तो उसने काउंटर पे बैठे सरदार जी को बताया कि ये आदमी पहले भी दो तीन होटलों में ऐसा कर चुका है, और ये पैसे कभी नहीं भरेगा,
इसपर होटल के मालिक ने कहा " वो सिर्फ दाल रोटी खाकर गया है, कोई बटर चिकन या कोफ्ते पनीर खाकर नहीं गया, उसने अय्याशी करने के लिए नहीं, सिर्फ अपनी भूख मिटाने के लिए खाना खाया है, वो इसे एक होटल नहीं गुरुद्वारा समझकर आया था,और हम सिख लोग लंगर के पैसे नहीं लेते।
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